वाह, सदन से क्या बात ! Ser/Retd सैनिकों की पेंशन OROP, Sparsh,…

सैनिकों की पेंशन विवाद और स्पर्श पोर्टल पर राज्यसभा में चर्चा

जय हिंद दोस्तों आज हम बात करेंगे राज्यसभा में उठे एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर, जिसमें कांग्रेस की महाराष्ट्र से राज्यसभा सांसद श्रीमती रजनी अशोक राव पाटिल ने रक्षा मंत्रालय से सवाल पूछा। साथ ही, हम जानेंगे रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने इस पर क्या जवाब दिया।


1. सैनिकों की डिसेबिलिटी पेंशन पर सवाल

राज्यसभा में श्रीमती रजनी अशोक राव पाटिल ने सरकार से यह सवाल किया कि –

  • रक्षा मंत्रालय बार-बार सैनिकों की डिसेबिलिटी पेंशन को कोर्ट में क्यों चुनौती देता है?
  • सुप्रीम कोर्ट लगातार मंत्रालय को फटकार लगा चुका है कि क्यों यह मामले बार-बार कानूनी विवाद में फंसाए जाते हैं?
  • सरकार क्या कदम उठा रही है कि पूर्व सैनिकों और जवानों को बार-बार कोर्ट के चक्कर ना काटने पड़ें?

2. रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ का जवाब

रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने इस पर जवाब देते हुए कहा कि –

  • सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।
  • सैनिकों का सम्मान और उनकी जरूरतें पूरी करना सरकार की प्राथमिकता है।
  • डिसेबिलिटी पेंशन के नियम पूरी तरह स्पष्ट हैं, और जो भी व्यक्ति योग्य होता है, उसे पेंशन दी जाती है।

3. डिसेबिलिटी पेंशन के दो प्रकार

रक्षा मंत्री ने बताया कि डिसेबिलिटी पेंशन दो तरह की होती है –

(1) सर्विस के दौरान डिसेबिलिटी

  • यदि कोई सैनिक सेवा के दौरान घायल होता है और उसे नॉर्मल कार्यकाल से पहले रिटायर कर दिया जाता है, तो उसे डिसेबिलिटी पेंशन मिलती है।
  • इस स्थिति में सर्विस एलिमेंट और डिसेबिलिटी एलिमेंट जोड़कर पेंशन दी जाती है।

(2) रिटायरमेंट के बाद डिसेबिलिटी

  • यदि कोई सैनिक अपना पूरा कार्यकाल पूरा करने के बाद रिटायर होता है और उसकी डिसेबिलिटी 20% या उससे अधिक है, तो उसे भी डिसेबिलिटी पेंशन मिलती है।
  • इस स्थिति में सर्विस पेंशन के साथ डिसेबिलिटी एलिमेंट भी दिया जाता है।

4. स्पर्श पोर्टल पर सवाल

सांसद ने दूसरा सवाल यह पूछा कि –

  • स्पर्श पोर्टल से पेंशनर्स को परेशानी हो रही है क्योंकि यह सही तरीके से काम नहीं कर रहा है।
  • क्या सरकार इसे अधिक यूजर-फ्रेंडली बनाने पर विचार कर रही है?

5. रक्षा मंत्रालय का जवाब

रक्षा मंत्रालय ने इस पर कहा कि –

  • स्पर्श (SPARSH) पोर्टल डिजिटल इंडिया मिशन के तहत लॉन्च किया गया है।
  • यह पारदर्शी (transparent) है और इससे पेंशनर्स को रियल टाइम में अपने डेटा की जानकारी मिलती है
  • 119 स्पर्श सेवा केंद्र बनाए गए हैं, और 14 बड़े बैंकों के माध्यम से भी सहायता दी जा रही है।
  • सरकार लगातार पोर्टल में सुधार कर रही है ताकि पेंशनर्स को कम से कम दिक्कतों का सामना करना पड़े।

6. वन रैंक, वन पेंशन (OROP) पर चर्चा

इसके बाद कांग्रेस सांसद रजनी अशोक राव पाटिल ने वन रैंक, वन पेंशन (OROP) से जुड़ा सवाल पूछा। उन्होंने जानना चाहा कि –

  • OROP स्कीम में क्या विसंगतियां हैं और सरकार इन्हें कैसे हल कर रही है?

7. वन रैंक, वन पेंशन पर सरकार का जवाब

रक्षा मंत्री ने बताया कि –

  • 1972 से OROP की मांग उठती रही थी, लेकिन 42 साल तक कोई सरकार इसे लागू नहीं कर सकी।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे 2015 में लागू किया।
  • OROP का मकसद पुराने और नए रिटायर होने वाले सैनिकों के पेंशन अंतर को कम करना है।
  • हर 5 साल में इसे संशोधित किया जाता है ताकि नए और पुराने सैनिकों की पेंशन में अंतर ना रहे।
  • अब तक 12,000 करोड़ रुपये OROP के तहत वितरित किए जा चुके हैं।

8. राज्य सरकारों की जिम्मेदारी

रक्षा मंत्री ने कहा कि राज्य सरकारें भी पूर्व सैनिकों के कल्याण के लिए जिम्मेदार हैं।

  • पश्चिम बंगाल जैसे कुछ राज्यों में सैनिक कल्याण बोर्ड ठीक से काम नहीं कर रहे हैं।
  • राज्य सरकारों को भी अपने स्तर पर प्रयास करने चाहिए ताकि पूर्व सैनिकों को समस्याओं का सामना ना करना पड़े।

9. राज्यसभा में स्पीकर की सलाह

राज्यसभा के स्पीकर ने कहा कि –

  • सवाल स्पष्ट और संक्षिप्त होने चाहिए, ताकि उत्तर भी सीधा और स्पष्ट मिले।
  • इससे संसद में चर्चा अधिक प्रभावी होगी।

10. निष्कर्ष

राज्यसभा की इस चर्चा से यह स्पष्ट हुआ कि –
डिसेबिलिटी पेंशन के नियम स्पष्ट हैं, लेकिन कोर्ट में जाने की समस्याएं बनी हुई हैं।
स्पर्श पोर्टल को बेहतर बनाने की जरूरत है।
वन रैंक, वन पेंशन लागू हो चुका है, और इसे हर 5 साल में संशोधित किया जा रहा है।
राज्य सरकारों को भी पूर्व सैनिकों के कल्याण के लिए प्रयास करने चाहिए।


आपकी राय क्या है?

दोस्तों, यह थी राज्यसभा में सैनिकों की पेंशन से जुड़ी चर्चा की पूरी जानकारी।
आपका क्या मानना है? क्या सरकार को डिसेबिलिटी पेंशन के मामलों में अधिक सहानुभूति दिखानी चाहिए?
क्या स्पर्श पोर्टल को और सुधारने की जरूरत है?
कमेंट में अपनी राय जरूर दें।

फिर मिलेंगे सैनिकों के हित से जुड़ी किसी नई जानकारी के साथ।
तब तक के लिए – जय हिंद! जय भारत!

Hi im Rajani Singh. Helping veterans and ex-servicemen is a noble and impactful cause. These individuals have dedicated a significant portion of their lives to serving their country, often facing immense physical and emotional challenges. Supporting them as they transition back into civilian life can involve offering job opportunities, mental health care, housing, and community support. Many veterans struggle with post-traumatic stress disorder (PTSD) or physical disabilities, and ensuring they have access to quality healthcare and rehabilitation services is crucial. Educational programs and skill development initiatives can also help them reintegrate into the workforce. Moreover, creating a supportive and understanding community helps veterans regain a sense of belonging and purpose. By advocating for their needs, we honor their service and sacrifices, ensuring they receive the care and respect they deserve.

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