
पूर्व सैनिकों की मांगों पर प्रधानमंत्री से सीधी वार्ता की अपील
जय हिंद दोस्तों
आज हम एक बेहद महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा करने जा रहे हैं, जो लाखों पूर्व सैनिकों, वीर नारियों और उनके आश्रितों के कल्याण से जुड़ा हुआ है। देश की रक्षा में अपने जीवन का सर्वोत्तम समय देने वाले हमारे सैनिक जब सेवानिवृत्त होते हैं, तो उनके समक्ष कई चुनौतियाँ आ खड़ी होती हैं। पेंशन, डिसएबिलिटी पेंशन, प्रीमैच्योर रिटायरमेंट, मिलिट्री सर्विस पे, ओआरओपी और सातवें वेतन आयोग में हुई विसंगतियाँ जैसे कई मुद्दे वर्षों से लंबित हैं।
इन्हीं समस्याओं के समाधान के लिए फेडरेशन ऑफ वेट्स एसोसिएशन (FWA), जो 160 से अधिक पूर्व सैनिक संगठनों का प्रतिनिधित्व करता है, ने 18 जनवरी 2025 को रक्षा मंत्री को पत्र लिखा था। इस पत्र में पूर्व सैनिकों की समस्याओं के समाधान हेतु सरकार से वार्ता की अपील की गई थी। लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं आई है, जिससे पूर्व सैनिक समुदाय में निराशा और असंतोष बढ़ता जा रहा है।
अब 18 मार्च 2025 को FWA द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को पत्र लिखा गया है। इस पत्र में पुरानी अपीलों का हवाला देते हुए यह अनुरोध किया गया है कि पूर्व सैनिकों के प्रतिनिधिमंडल से जल्द से जल्द वार्ता की जाए ताकि उनकी लंबित समस्याओं का समाधान निकाला जा सके।
पूर्व सैनिकों की प्रमुख मांगें
पूर्व सैनिकों की समस्याएँ लंबे समय से लंबित हैं और सरकार से उनके समाधान की उम्मीद की जा रही है। इन मुद्दों में मुख्य रूप से शामिल हैं:
1. वन रैंक वन पेंशन (OROP) की विसंगतियाँ
वन रैंक वन पेंशन योजना को लागू तो किया गया, लेकिन इसके भीतर कई विसंगतियाँ बनी हुई हैं। पूर्व सैनिकों की माँग है कि OROP का सही तरीके से पुनरीक्षण किया जाए और सभी सेवानिवृत्त सैनिकों को उनकी रैंक और सेवा अवधि के अनुसार समान पेंशन मिले।
2. सातवें वेतन आयोग की विसंगतियाँ
सातवें वेतन आयोग के तहत सैनिकों को वेतन और भत्तों में जो बढ़ोतरी मिलनी चाहिए थी, वह नहीं मिली। इसके अलावा, कई भत्तों में कटौती कर दी गई, जिससे सैनिकों और पूर्व सैनिकों को आर्थिक नुकसान हुआ है।
3. मिलिट्री सर्विस पे (MSP) में सुधार
मिलिट्री सर्विस पे (MSP) उन सैनिकों के लिए एक अतिरिक्त भत्ता है जो कठिन परिस्थितियों में सेवा करते हैं। लेकिन इसके निर्धारण में कई असमानताएँ हैं। सैनिकों की माँग है कि MSP को सभी रैंकों के लिए समान रूप से बढ़ाया जाए और इसे निष्पक्ष रूप से लागू किया जाए।
4. विकलांगता पेंशन (Disability Pension) में सुधार
युद्ध या सैन्य सेवा के दौरान अपंगता झेलने वाले सैनिकों को विकलांगता पेंशन दी जाती है। लेकिन हाल के वर्षों में इसमें कटौती की गई है और कई मामलों में इसे नकारा भी जा रहा है। पूर्व सैनिक समुदाय ने मांग की है कि डिसएबिलिटी पेंशन को फिर से पूर्ववत किया जाए और सभी योग्य सैनिकों को लाभ दिया जाए।
5. प्रीमैच्योर रिटायरमेंट पर पुनर्विचार
सेना में जवानों को अपेक्षाकृत कम उम्र में सेवानिवृत्त होना पड़ता है, जिससे उनकी दूसरी पारी की नौकरी को लेकर कठिनाइयाँ बढ़ जाती हैं। पूर्व सैनिक चाहते हैं कि सरकार उनके लिए पुनर्वास योजनाएँ लाए और उन्हें सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता दी जाए।
6. आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) की घोषणा और पूर्व सैनिकों के लाभ
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन की घोषणा की। पूर्व सैनिकों की मांग है कि इस आयोग में सैनिकों की विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए वेतन और पेंशन निर्धारण किया जाए।
सरकार की चुप्पी पर सवाल
पूर्व सैनिकों का कहना है कि सरकार का उनकी समस्याओं पर चुप रहना बेहद चिंताजनक है।
- क्यों पूर्व सैनिकों की समस्याओं पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जा रहा?
- क्या पूर्व सैनिक इस देश का हिस्सा नहीं हैं?
- क्या पूर्व सैनिकों ने देश की रक्षा में अपना सर्वस्व न्योछावर नहीं किया?
- क्या उनकी समस्याओं को सुनने के लिए उन्हें भी सड़कों पर उतरना पड़ेगा?
सरकार ने अभी तक पूर्व सैनिकों के पत्रों का जवाब नहीं दिया है। क्या लोकतांत्रिक देश में पूर्व सैनिकों को अपनी माँगे मनवाने के लिए धरने-प्रदर्शन और आंदोलन का सहारा लेना पड़ेगा?
क्या पूर्व सैनिकों को आंदोलन के लिए मजबूर किया जाएगा?
पूर्व सैनिक समुदाय शांति और अनुशासन में विश्वास रखता है। वे नहीं चाहते कि वे सड़कों पर उतरें या किसी तरह के आंदोलन में शामिल हों। लेकिन अगर सरकार उनकी माँगों को लगातार नजरअंदाज करती रही, तो क्या उनके पास कोई और विकल्प बचता है?
फेडरेशन ऑफ वेट्स एसोसिएशन (FWA) ने इस पत्र में यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि वार्ता के लिए कोई सकारात्मक जवाब नहीं आता, तो पूर्व सैनिक आंदोलन करने के लिए विवश होंगे। और इसकी संपूर्ण ज़िम्मेदारी भारत सरकार की होगी।
प्रधानमंत्री जी से अपील
माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से हमारी विनम्र अपील है कि:
- पूर्व सैनिकों के प्रतिनिधिमंडल से तत्काल वार्ता करें।
- लंबित पेंशन एवं वेतन संबंधी मांगों का समाधान निकाला जाए।
- पूर्व सैनिकों को पुनर्वास और नौकरी के बेहतर अवसर प्रदान किए जाएं।
- आठवें वेतन आयोग में सैनिकों की विशेष स्थिति को ध्यान में रखा जाए।
भारत के पूर्व सैनिकों ने अपने जीवन के स्वर्णिम वर्ष देश की रक्षा में समर्पित कर दिए। अब जब उन्हें सरकार से न्याय की उम्मीद है, तो उनकी आवाज़ को अनसुना नहीं किया जाना चाहिए।
यदि सरकार ने शीघ्र ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो पूर्व सैनिकों को भी अन्य आंदोलनों की तरह सड़कों पर उतरना पड़ेगा। लेकिन क्या सरकार चाहती है कि जो सैनिक कभी देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे थे, वे अब अपने हक के लिए प्रदर्शन करने पर मजबूर हों?
हमें उम्मीद है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी इस अपील को गंभीरता से लेंगे और शीघ्र ही पूर्व सैनिकों की समस्याओं के समाधान हेतु कदम उठाएँगे।
जय हिंद! जय भारत!